लोन EMI कैलकुलेटर
मासिक किस्त, कुल ब्याज और हर साल के पेमेंट में से कितना ब्याज में और कितना लोन चुकाने में जाता है।
साल-दर-साल टेबल
EMI का हर साल कितना चुकाता है
EMI कैसे निकाली जाती है
EMI = P × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1), जहां P लोन की रकम है, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12) और n महीनों की संख्या। शुरुआती EMI में ज़्यादातर हिस्सा ब्याज का होता है, क्योंकि ब्याज पूरे बकाया लोन पर लगता है। जैसे-जैसे लोन घटता है, हर EMI का ज़्यादा हिस्सा मूलधन में जाता है।
Key Fact Statement पढ़ें
1 अक्टूबर 2024 से बैंकों और NBFC को रिटेल लोन पर साइन कराने से पहले आपको Key Fact Statement देना ज़रूरी है। इसमें सालाना प्रतिशत दर (APR) दिखती है, जिसमें ब्याज के साथ फीस भी जुड़ी होती है, और पूरा रीपेमेंट शेड्यूल होता है। जो फीस स्टेटमेंट में नहीं लिखी, वह लेंडर आपकी सहमति के बिना नहीं ले सकता। लोन की तुलना APR पर करें, विज्ञापन वाली दर पर नहीं।
लोन के ब्याज पर GST नहीं लगता। प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज पर 18% GST लगता है।
गाइड
सवाल
क्या कम अवधि बेहतर है?
कम अवधि का मतलब है ज़्यादा EMI, लेकिन कुल ब्याज बहुत कम। वह सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI आप हर महीने आराम से चुका सकें।
APR क्या है?
एनुअल परसेंटेज रेट (APR) लोन का सालाना खर्च है, जिसमें ब्याज और सभी फीस शामिल हैं। RBI के नियम के मुताबिक लेंडर को इसे Key Fact Statement में दिखाना होता है।
क्या प्रीपेमेंट से फायदा होता है?
प्रीपेमेंट से मूलधन घटता है, इसलिए आगे का ब्याज कम होता है। पहले अपनी लोन की शर्तों में प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज देख लें।
स्रोत
सिर्फ उदाहरण के लिए। लोन शुरू होने की तारीख और राउंडिंग के तरीके की वजह से आपके लेंडर का शेड्यूल थोड़ा अलग हो सकता है। Saifu लोन नहीं देता और न ही लोन के लिंक देता है।
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