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कैलकुलेटर

इनकम टैक्स कैलकुलेटर: पुरानी बनाम नई व्यवस्था

टैक्स वर्ष 2026-27, Income-tax Act, 2025 के तहत पहला। अपनी आय और कटौतियां डालें और देखें कि किस व्यवस्था में टैक्स कम लगता है, और पुरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कितनी कटौतियां चाहिए।

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दोनों व्यवस्थाओं में मिलता है, नई में बेसिक पे और DA के 14% तक; पुरानी में 10% तक, या सरकारी एम्प्लॉयर हो तो 14% तक। सिर्फ उतनी रकम डालें जितनी मिलती है।

पुरानी व्यवस्था की कटौतियां

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₹1.5 लाख तक सीमित।
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आपके परिवार के लिए ₹25,000 (वरिष्ठ नागरिक हों तो ₹50,000), और माता-पिता के लिए इतना ही और।
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₹2 लाख तक।
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इनमें से सबसे कम: मिला HRA; सूची के 8 शहरों में बेसिक का 50% (बाकी जगह 40%); किराया घटा बेसिक का 10%। इसे HRA कैलकुलेटर में निकालें।
नई व्यवस्था में टैक्स–
पुरानी व्यवस्था में टैक्स–
कम टैक्स–
इससे ऊपर पुरानी व्यवस्था बेहतर–कटौतियों में, स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा
स्लैब-दर-स्लैब

हर व्यवस्था में टैक्स, सरचार्ज और सेस

नई व्यवस्था, टैक्स वर्ष 2026-27

बजट 2026 ने 2025-26 वाले स्लैब ही रखे। नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है।

  • ₹4 लाख तक: शून्य। ₹4 से 8 लाख: 5%। ₹8 से 12 लाख: 10%। ₹12 से 16 लाख: 15%। ₹16 से 20 लाख: 20%। ₹20 से 24 लाख: 25%। ₹24 लाख से ऊपर: 30%।
  • ₹60,000 तक के रिबेट का मतलब है कि टैक्स योग्य आय ₹12 लाख या उससे कम होने पर कोई टैक्स नहीं। ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर होने पर मार्जिनल रिलीफ टैक्स को ₹12 लाख से ऊपर की आय तक सीमित रखता है।
  • नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, इसलिए ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं।
  • लगभग कोई और कटौती नहीं मिलती। मुख्य कटौती आपके एम्प्लॉयर का NPS योगदान है।

पुरानी व्यवस्था

  • 60 से कम उम्र: ₹2.5 लाख तक शून्य, ₹2.5 से 5 लाख 5%, ₹5 से 10 लाख 20%, ₹10 लाख से ऊपर 30%। 60 साल से शून्य वाला स्लैब ₹3 लाख और 80 साल से ₹5 लाख है।
  • ₹12,500 तक के रिबेट का मतलब है कि टैक्स योग्य आय ₹5 लाख या उससे कम होने पर कोई टैक्स नहीं।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000, और साथ में सेक्शन 123 (पुराना 80C), हेल्थ इंश्योरेंस, NPS, होम लोन ब्याज और HRA जैसी कटौतियां।

दोनों व्यवस्थाएं

टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जुड़ता है। सरचार्ज ₹50 लाख से ऊपर (10%), ₹1 करोड़ (15%), ₹2 करोड़ (25%) और ₹5 करोड़ (37%, सिर्फ पुरानी व्यवस्था; नई व्यवस्था में 25% पर रुकता है) पर लगता है, और हर स्तर से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ मिलता है। नौकरीपेशा लोग हर साल रिटर्न भरते समय कोई भी व्यवस्था चुन सकते हैं; बिज़नेस आय वाले लोग नई व्यवस्था में सिर्फ एक बार वापस आ सकते हैं।

यह कैलकुलेटर पूरी आय को स्लैब रेट पर मानता है। शेयर और फंड पर कैपिटल गेन पर खास दरों से टैक्स लगता है और वह इसमें शामिल नहीं है।

गाइड

सवाल

मेरे लिए कौन-सी व्यवस्था बेहतर है?

जब तक आपकी कटौतियां बड़ी न हों, नई व्यवस्था आम तौर पर बेहतर रहती है। "इससे ऊपर पुरानी व्यवस्था बेहतर" के नीचे का आंकड़ा बताता है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा कितनी कटौतियां चाहिए, ताकि पुरानी व्यवस्था में टैक्स कम लगे।

क्या ₹12.75 लाख की सैलरी सच में टैक्स-फ्री है?

नई व्यवस्था में हां, अगर पूरी आय सैलरी है: ₹12.75 लाख घटा ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन = ₹12 लाख, और रिबेट ₹12 लाख तक का टैक्स कवर करता है। कैपिटल गेन जैसी खास दर वाली आय पर रिबेट नहीं मिलता।

Income-tax Act, 2025 से क्या बदला?

1 अप्रैल 2026 से नए एक्ट ने 1961 के एक्ट की जगह ले ली। सेक्शन नंबर बदल गए, जैसे 80C अब सेक्शन 123 है और 87A सेक्शन 156, और "previous year" अब "tax year" (टैक्स वर्ष) हो गया। 2026-27 की दरें वही रहीं।

स्रोत

सिर्फ उदाहरण के लिए, ऐसे निवासी व्यक्ति के लिए जिसकी आय पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। यह टैक्स सलाह नहीं है। रिटर्न भरने से पहले आयकर विभाग के अपने कैलकुलेटर या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से जांच कर लें।

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