OTP शेयर करके पैसा गंवाया? केरल हाई कोर्ट ने RBI के ज़ीरो लायबिलिटी नियम के तहत SBI से रिफंड दिलाया
केरल हाई कोर्ट ने SBI से OTP शेयर करने वाली ठगी की शिकार को ₹3.73 लाख लौटाने को कहा। जानिए RBI का ज़ीरो लायबिलिटी नियम क्या कहता है और रिफंड कैसे मांगें।
बहुत से लोग मानते हैं कि एक बार ठग को OTP बता दिया, तो बैंक की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती। 19 और 20 अक्टूबर 2026 को रिपोर्ट हुआ केरल हाई कोर्ट का एक फैसला दिखाता है कि बात हमेशा इतनी सीधी नहीं है। यहां जानिए क्या हुआ और नियम क्या कहता है।
कोर्ट ने क्या फैसला दिया
कन्नूर ज़िले की एक रिटायर्ड कॉलेज प्रिंसिपल का SBI में सेविंग्स खाता था। 13 जुलाई 2019 को उन्हें SMS आया कि उनका डेबिट कार्ड ब्लॉक होने वाला है, फिर उसी नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने बैंक का सिक्योरिटी ऐप "रजिस्टर" करने के लिए OTP मांगा। उन्होंने OTP बता दिया, और उनके खाते से ₹3,73,000 निकल गए।
उन्होंने तुरंत बैंक के कस्टमर केयर को फोन किया और उनकी इंटरनेट बैंकिंग ब्लॉक कर दी गई। उसी दिन उन्होंने ब्रांच और पुलिस में शिकायत की। पुलिस जांच में पैसा पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति तक पहुंचा। फिर भी बैंकिंग ओम्बड्समैन ने उनकी शिकायत खारिज कर दी, तो वे हाई कोर्ट गईं।
5 अक्टूबर 2026 को जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने ओम्बड्समैन का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि वे ठगी में शामिल नहीं थीं, बैंक उनकी लापरवाही साबित नहीं कर पाया, और उन्होंने उसी दिन ठगी की शिकायत की थी। इसलिए RBI के नियमों के तहत वे ज़ीरो लायबिलिटी की हकदार थीं। SBI को चार हफ्ते में ₹3,73,000 लौटाने को कहा गया। यह WP(C) No. 28970 of 2021 के फैसले के तहत है, जैसा LiveLaw और Financial Express ने बताया।
यह एक केस के तथ्यों पर एक जज का फैसला है। इसका मतलब यह नहीं कि OTP बताने वाले हर ग्राहक को पैसा वापस मिल जाएगा।
RBI का ज़ीरो लायबिलिटी नियम क्या कहता है
अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर RBI के नियम, जो पहली बार 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर में तय हुए थे, बताते हैं कि नुकसान कौन उठाएगा:
- बैंक की गलती: अगर ठगी बैंक की लापरवाही या उसके सिस्टम की कमी से हुई, तो आपका कोई नुकसान नहीं, चाहे आप कभी भी शिकायत करें।
- किसी तीसरे की सेंधमारी: अगर न आपकी गलती है न बैंक की, तो बैंक का अलर्ट मिलने के 3 कामकाजी दिनों में बताने पर आपका कोई नुकसान नहीं।
- 4 से 7 कामकाजी दिनों में शिकायत: आपका नुकसान सीमित रहता है। बेसिक सेविंग्स (BSBD) खाते के लिए ₹5,000, बाकी सेविंग्स खातों और ₹5 लाख तक की लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड के लिए ₹10,000, और ज़्यादातर बाकी खातों के लिए ₹25,000, या लेनदेन की रकम अगर वह कम हो।
- आपकी लापरवाही: अगर नुकसान आपकी लापरवाही से हुआ, जैसे कार्ड की जानकारी या OTP बताना, तो शिकायत करने तक का नुकसान आप उठाते हैं। शिकायत के बाद निकला पैसा बैंक का नुकसान है।
दो बातें और अहम हैं। आपकी लापरवाही बैंक को साबित करनी होती है, आपको यह साबित नहीं करना होता कि आपने लापरवाही नहीं की। और शिकायत मिलने पर बैंक को 10 कामकाजी दिनों में विवादित रकम कम से कम अस्थायी रूप से आपके खाते में डालनी होती है, और 90 दिनों में शिकायत निपटानी होती है।
अगर आपके खाते से पैसा निकल जाए तो क्या करें
- तुरंत शिकायत करें। बैंक का ऐप, टोल-फ्री नंबर या SMS अलर्ट का रिप्लाई विकल्प इस्तेमाल करें, और अपना कार्ड या नेट बैंकिंग ब्लॉक करें। शिकायत नंबर नोट कर लें।
- 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस को भी लिखित में बताएं।
- सबूत रखें: SMS अलर्ट, कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट, शिकायत नंबर और शिकायत करने का समय।
- बैंक से लिखित में मांगें कि ग्राहक की लायबिलिटी सीमित करने वाले RBI नियम के तहत अस्थायी क्रेडिट दिया जाए।
- अगर बैंक मना करे या 30 दिनों में जवाब न दे, तो cms.rbi.org.in पर RBI ओम्बड्समैन से शिकायत करें।
सबसे सुरक्षित नियम अब भी सबसे आसान है: कोई बैंक, RBI, पुलिस या सरकारी अधिकारी कभी आपका OTP, PIN या CVV नहीं मांगेगा। इसे किसी को न बताएं, भले ही कॉल या SMS असली लगे।
स्रोत: केरल हाई कोर्ट: WP(C) No. 28970 of 2021 का फैसला, 5 अक्टूबर 2026, LiveLaw: Kerala High Court orders SBI to refund ₹3.73 lakh to cybercrime victim, Financial Express: Kerala HC orders bank to refund Rs 3.73 lakh, RBI: अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक की लायबिलिटी सीमित करना, 6 जुलाई 2017, RBI कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल।
नियम, दरें और सीमाएं बदलती रहती हैं। यहां के किसी आंकड़े पर भरोसा करने से पहले ऊपर दिए आधिकारिक स्रोत को देखें। पोस्ट में लेखक के रेफरल या एफिलिएट लिंक कभी नहीं होते।
यह लेख अंग्रेज़ी से अनुवाद किया गया है। अगर कुछ गलत लगे, तो hello@saifu.in पर ईमेल करें।