UP में रेंट एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी घटी: किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए नए चार्ज
उत्तर प्रदेश ने 10 साल तक के रेंट एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की सीमा तय की। ₹2 लाख तक सालाना किराए पर एक साल का एग्रीमेंट ₹2,000 में।
आज़माएं: HRA छूट कैलकुलेटरपुरानी व्यवस्था में अपने हाउस रेंट अलाउंस का टैक्स-फ्री हिस्सा निकालें, अब 50% की सीमा में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद भी शामिल हैं।अगर आप उत्तर प्रदेश में घर या दुकान किराए पर लेते या देते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री अब काफी सस्ती हो गई है। राज्य ने 10 साल तक के किराया और लीज डीड पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की अधिकतम सीमा तय कर दी है। आपको कितना देना होगा और इसका आप पर क्या असर है, यहां जानिए।
क्या बदला
UP कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को नई दरें मंज़ूर कीं। हिन्दुस्तान (लाइव हिन्दुस्तान) की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की। 20 अक्टूबर 2026 को Business Standard समेत कई जगह यह खबर छपी।
सीमा दो बातों पर निर्भर है: औसत सालाना किराया और एग्रीमेंट कितने समय का है।
रेंट एग्रीमेंट पर नई स्टांप ड्यूटी
| औसत सालाना किराया | 1 साल तक | 1 साल से ज़्यादा, 5 साल तक | 5 साल से ज़्यादा, 10 साल तक | | --- | --- | --- | --- | | ₹2 लाख तक | ₹1,000 | ₹2,000 | ₹4,000 | | ₹2 लाख से ₹6 लाख | ₹3,000 | ₹6,000 | ₹8,000 | | ₹6 लाख से ₹10 लाख | ₹4,500 | ₹10,000 | ₹13,000 |
यह ज़्यादा से ज़्यादा रकम है। Hindustan Times और Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन फीस भी इतनी ही लगती है। यानी कुल खर्च टेबल की रकम का दोगुना होगा।
- ₹10 लाख से ज़्यादा सालाना किराया: पहले ₹10 लाख पर तय सीमा वाली दर लगेगी। उससे ऊपर के किराए पर UP में लागू भारतीय स्टांप अधिनियम के अनुच्छेद 35 की सामान्य दर लगेगी।
- शामिल नहीं: टोल पट्टा और खनन पट्टा।
आपके लिए इसका मतलब
मान लीजिए एक फ्लैट ₹15,000 महीने किराए पर है। यह साल में ₹1.8 लाख हुआ, इसलिए यह पहली लाइन में आता है। एक साल के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पर अब ₹1,000 स्टांप ड्यूटी और ₹1,000 रजिस्ट्रेशन फीस, यानी कुल ₹2,000 लगेंगे। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इसी एग्रीमेंट पर करीब ₹10,000 लगते थे।
पहले UP में चार्ज किराए के हिस्से के तौर पर गिना जाता था, इसलिए लंबी लीज बहुत महंगी पड़ती थी। Hindustan Times के मुताबिक, ₹10 लाख तक सालाना किराए वाली 10 साल की लीज की रजिस्ट्री पर करीब ₹20 लाख तक लग सकते थे। अब अधिकतम ₹26,000 लगेंगे।
सरकार चाहती है कि ज़्यादा लोग उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत अपने एग्रीमेंट रजिस्टर कराएं। एक साल से ज़्यादा की लीज की रजिस्ट्री ज़रूरी है। खर्च से बचने के लिए कई लोग अब भी नोटरी स्टांप पेपर पर 11 महीने का एग्रीमेंट बनाते हैं, जो विवाद होने पर कमज़ोर सबूत होता है।
साइन करने से पहले
- औसत सालाना किराया निकालें। अगर किराया हर साल बढ़ता है, तो पूरी अवधि का किराया जोड़ें और सालों की संख्या से भाग दें।
- चार्ज जांचें। पैसे देने से पहले igrsup.gov.in पर IGRS UP के लीज स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से पुष्टि करें।
- लिखित में रखें किराया, सिक्योरिटी डिपॉज़िट, नोटिस की अवधि और मरम्मत का खर्च कौन देगा।
- साइन की हुई कॉपी रखें और किराए की रसीदें संभालें। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट और रसीदें HRA क्लेम करते समय भी काम आती हैं। HRA कैलकुलेटर।
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट में शर्तें दर्ज हो जाती हैं, लेकिन इससे मकान मालिक को अपने आप किरायेदार को निकालने या बकाया किराया वसूलने का हक नहीं मिल जाता। इसके लिए किरायेदारी कानून की प्रक्रिया ही अपनानी होगी।
स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान: लीज डीड पर स्टांप शुल्क की नई दरें, 12 अक्टूबर 2026, Business Standard: UP ने रेंट एग्रीमेंट चार्ज घटाए, 20 अक्टूबर 2026, Hindustan Times: UP कैबिनेट ने 10 साल तक के रेंट एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी घटाई, IGRS UP: लीज स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस कैलकुलेटर।
नियम, दरें और सीमाएं बदलती रहती हैं। यहां के किसी आंकड़े पर भरोसा करने से पहले ऊपर दिए आधिकारिक स्रोत को देखें। पोस्ट में लेखक के रेफरल या एफिलिएट लिंक कभी नहीं होते।
यह लेख अंग्रेज़ी से अनुवाद किया गया है। अगर कुछ गलत लगे, तो hello@saifu.in पर ईमेल करें।